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शेर खान और बकरियाँ

शेर खान और बकरियाँ

नवाचार स्त्रोत :- विद्यालय में कार्यभार संभालने के साथ साथ मैने ध्यान दिया कि अधिकांश बच्चे समय मिलते ही किसी न किसी खेल में व्यस्त हो जाते हैं तथा कभी-कभी कथा से दूसरी कक्षा में अध्यापक के जाते ही वह किसी विशेष खेल मुख्यता लंगडी के जीते हुए खींचते हुए खेलने में मग्न हो जाते हैं यह देखकर अक्सर मुझे अपना बचपन याद आ जाता तथा बच्चों को मैं दूसरी क्लास में होने की वजह से रोक भी नहीं पाता उस समय अध्यापक होने के नाते संवेदनशील होने के कारण मैंने सोचा कि क्यों ना कुछ ऐसा किया जाए जिससे बच्चों को भी खुशी व आनंद का वातावरण मिले तथा मुझे भी संतोष का अनुभव हो बच्चों का खेल भी हो जाए और शिक्षण का भी एक साथ किरण वयन क्रियान्वयन आता खेल खेल में शिक्षा के रूप में नवीन नवाचार का सृजन हो पाया हो।

चुनौतियाँ व सीमायें:- 

• नवाचार में शून्य निवेश मुख्य गुण व सीमा है ।

• नवाचार बच्चों के परिवेश के लिए उपयुक्त हो बच्चों के मन में नवाचार के प्रति उत्साह और उमंग लंबे समय तक बना रहे।

• नवाचार बच्चों को वैशाखी नहीं अपितु स्वतंत्र व आत्मनिर्भर बनाइए।

• जिससे वह तत्काल लाभ के साथ जीवन पर्यंत आचरण , विचार तथा शैली के रूप में आत्मसात् कर सकें।

लाभान्वित क्षेत्र:-

1. शैक्षणिक क्षेत्र 

2. अधिगम स्तर

3. आत्मविश्वास 

4. मन:स्थिति 

5. कल्पना शक्ति 

6. कांसेप्ट मैपिंग 

7. आत्मनिर्भर 

8. उपस्थिति 

9. प्रतिस्पर्धा

10. पाठ योजना

11. सह शैक्षणिक क्षेत्र

12. अधिगम स्तर

13. आत्मविश्वास 

14. मन:स्थिति 

15. कल्पना शक्ति 

16. कांसेप्ट मैपिंग 

17. आत्मनिर्भर 

18. उपस्थिति 

19. प्रतिस्पर्धा

20. पाठ योजना 

21. सामुदायिक विकास

• संरचना 

• बच्चों की संख्या के आधार पर चित्र अनुसार मैट्रिक्स बनाइए

• स्टार्ट पॉइंट पर एक बच्चे को खड़ा करें वह शेर खान होगा

• शेष अन्य बच्चों को भी पर्ची या randomly शेष बचे हुए खानों में बैठा दिया जाए जो कि बकरियां होगी 

नियम व तरीका

 शेरखान एक एक कदम किसी भी दिशा में आगे या पीछे दाएं या बाएं चल सकता है 

 यदि किसी खाने में बकरी मिलती है तो शेर खान उस बकरी को खाना होगा तथा बकरी शेरखान से बचना चाहेगी

 इस क्रम में बकरी पहले से तय एक या एक से अधिक प्रकरण या विषय से संबंधित कोई भी प्रश्न शेर खान से पूछेगी 

 यदि शेर खान उत्तर दे देता है तो समझा जाएगा कि शेर खान ने बकरी को खा लिया I

 अब वह बकरी अपना स्थान छोड़कर बाहर चली जाएगी तथा शेरखान एक बकरी खाकर दूसरी किसी कमजोर बकरी की तरफ आगे बढ़ जाएगा

 जबकि उत्तर ना देने पर शेरखान फंस जाएगा तथा उस बकरी द्वारा अन्य सारी बकरियों की जान बच जाएगी और सारे बच्चे खुशी से झूम उठेंगे खेल खत्म हो जाएगा और गिना जायेगा कि शेर खान ने कितनी बकरियां खाली 

 तब तक खेल चलता रहेगा जब तक कि सारी बकरियां खाली न जाए अथवा शेरखान फंस न  ।

नवाचार से प्रायोजित लाभ:-

• उपस्थिति:- पूर्व की तुलना में बच्चों की उपस्थिति में काफी वृद्धि होनी चाहिए।

• अधिगम स्तर:- बच्चों के अधिगम स्तर में पूर्व की तुलना से वृद्धि होनी चाहिए।

• आत्मविश्वास :- बच्चों के आत्मविश्वास में वृद्धि होनी चाहिए जिससे वह दृढ़ता से अपनी बात रख सकें।

• मन:स्थिति :- अध्यापक बच्चों के मन की स्थिति को परख सके और उसके लिए उसी के अनुसार पाठ योजना बना सके।

• कल्पना शक्ति:- छात्र-छात्राओं को अवसर जिसमें वह स्वच्ता किसी भी विषय वस्तु या पाठ को गहराई से समझे तथा नवीन प्रश्नोत्तर के निर्माण में अपनी कल्पना शक्ति का विकास करें।

• कांसेप्ट मैपिंग:- संपूर्ण पाठ को विभिन्न ATM तथा रोचक ढंग से बच्चों को समझाया जाना चाहिए जिससे उस पाठ से संबंधित सभी तथ्य व जानकारी वह आसानी से समझ सके तथा याद कर सकें।

• आत्मनिर्भर:- नवाचार वह अध्यापक बच्चों को बैसाखी नहीं अपितु स्वतंत्र व आत्मनिर्भर बनाई जिससे वह तत्काल लाभ के साथ-साथ जीवन पर्यंत आचरण विचार तथा शैली के रूप में आत्मसात् कर सकें। 

• प्रतिस्पर्धा:- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से बच्चों में एक दूसरे से आगे बढ़ने की भावना का विकास हो और वह नवीन जानकारियां जानने के लिए उत्सुक कर रहे।

• पाठ योजना :- रोचक व तथ्यपूर्ण पाठ योजना के आधार पर बच्चों को संपूर्ण पाठ का ज्ञान बहुत ही शुभम तावा आसानी से कराया जाना चाहिए।

• प्रयोगात्मक:- विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से किसी भी तथ्य या विषय वस्तु को सुगमता वह आसानी से समझाया जा सकता है अतः पाठ को उस किस विषय से आधारित प्रयोगों के माध्यम से बच्चों को समझाना चाहिए।

• पढ़ने की कला :- बच्चों में पुस्तक को पढ़ने की शैली का विकास हो जिसमें वह पेंसिल के माध्यम से विभिन्न तथ्य व महत्वपूर्ण जानकारी को रेखांकित कर सकें तथा भविष्य में आसानी से पाठ में ढूंढ व याद कर सकें।

• समूह भावना:- बच्चों में समूह भावना का विकास होना चाहिए जिसके माध्यम से वह एकता में शक्ति का पाठ पढ़ सकें तथा जीवन में आत्मसात कर सकें।

• शारीरिक स्वास्थ्य:- विभिन्न क्रिया-कलापों के माध्यम से बच्चों का स्वास्थ्य उत्तम रहना चाहिए।

• मानसिक स्वास्थ्य विद्यालय की वातावरण मैं बच्चों को प्रसन्नता उत्साह तथा उमंग का अनुभव होना चाहिए जिससे वह सर्जनात्मक कार्यों की ओर आगे बढ़े तथा रोचकता के साथ अधिगम और पाठ योजना को तैयार कर सकें।

• व्यावहारिक :- विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से उन्हें किताबी ज्ञान के साथ साथ व्यवहारिक ज्ञान तथा सदाचार व नैतिकता का ज्ञान होना चाहिए जिसे वह जीवन में आत्मसात कर सकें।

नवाचार से वास्तविक प्राप्त परिणाम:-

• उपस्थिति:- विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति में पूर्व की तुलना में काफी वृद्धि हुई है कहीं कक्षाओं में प्रतिशत वृद्धि हुई है। भविष्य में और भी सफल परिणाम की पूर्ण संभावना है।

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